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Full text of "Haryana Gazette, 1986-10-15, No. 43"

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HARYANA GOVT GAZ ., OCT . 28 , 1986 (KRTK . 6, 1908 SAKA ) 


(PART I 


राम 


दास 


दिनांक 15 अक्तूबर , 1986 
सं ० प्रो ०वि ०/ रोहतक / 71-86/ 38618 .--- चूंकि . हरियाणा के राज्यपाल की राये है कि मैं 
बरकत राम, वी -37, एम.आई.ई., बहादुरगढ़ , रोहतक के श्रमिक श्री विश्नू दत्त, पुत्र श्री ख्याली राम , बी -18, कबारी फैक्ट्री 
बिल्डिग , एम.आई.ई., बहादुरगढ़, रोहतक तथा उत्तके प्रबन्धकों के बीच इस में इसके बाद लिखित मामले में कोई प्रौद्योगिक विवाद है ; 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं । 

इसलिये , अब , प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई शक्तियों 
का प्रयोग करते हुये हरियाणा के राज्यपाल इस के द्वारा सरकारी अधिसूचना सं ० 9641-1 - श्रम -78/ 32573, दिनांक 6 नवम्बर, 
1970 के साथ पठित सरकारी अधिनियम की धारा 7 के अत्रीन गठित श्रम न्यायालय , रोहतक को विवादग्रस्त या उससे सुसंगत या उससे 
सम्बन्धित नीचे लिखा मामला न्यायनिर्णय एवं पंचाट तीन मास में देने हेतु निर्दिष्ट करते हैं जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच 
या तो विवादग्रस्त मामला है या उक्त विवाद से सुसंगत अथवा सम्बन्धित है: 

क्या श्री विश्नू दत्त की सेवाओं का समापन न्यायोचित तया ठीक है ? यदि नहीं, तो वह किस राहत का हकदार है ? 

सं ० ओ ० वि ०/एफडी /91-86/ 38625.-- चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मै ० हरियाणा शहरी विकास 
प्राधिकरण ( हरटीकल्चर डिपार्टमेन्ट), सैक्टर 16, फरीदाबाद के श्रमिक श्री गौरी शंकर, पुत्र श्री दशरथ मार्फत प्रधान 
मर्कनटाईल इम्पलाईज एसोसिएशन , एच०-347, न्यु राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली--110060 तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य 
इस में इसके बाद लिखित मामले में कोई औद्योगिक विवाद है ; 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिये, अब, औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
शक्तियों का प्रयोग करते हुये हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं ० 5415-3 - श्रम -68/15254, दिनांक 
20 जून , 1978 के साथ पढ़ते हुये अधिसूचना सं ० 11495- जी - श्रम-57/ 1124 5,दिनांक 7 फरवरी, 1958 द्वारा उक्त अधिनियम की 
धारा 7 के अधीन गठित श्रम न्यायालय , फरीदाबाद को विवादग्रस्त या उससे सुसंगत या उससे सम्बन्धित नीचे लिखा मामला न्याय 
निर्णय एवं पंचाट तीन मास में देने हेतु निर्दिष्ट करते हैं जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिकों के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या 
विवाद से सुसंगत अथवा सम्बन्धित मामला है : 

क्या श्री गौरी शंकर की सेवायों का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं, तो वह किस राहत का हकदार है ? 

सं ० प्रो ० वि ०/ 386 32.-~~ चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राये है कि उपायुक्त , जीन्द, ( 2) खण्ड विकास 
अधिकारी, कलायत , तहसील नरवाना, जिला जीन्द, के श्रमिक श्री जगीर सिंह चालक, पुत्र श्री करतार सिंह, गांव चम्मो कलां, 
तहसील थानेसर, जिला कुरुक्षेत्र तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इस में इसके बाद लिखित मामले में कोई औद्योगिक विवाद है ; 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिए, अब , प्रौद्योगिकः विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
शक्तियों का प्रयोग करते हुये हरियाणा के राज्यपाल इस के द्वारा सरकारी अधिसूचना सं ० 3( 44 ) 84-3- श्रम, दिनांक 18 अप्रैल , 
1984 द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 7 के अधीन गठित श्रम न्यायालय , अम्बाला को विवादग्रस्त या उससे सम्बन्धित नीचे लिखा 
मामला न्यायनिर्णय एवं पंचाट तीन मास में देने हेतु निर्दिष्ट करते हैं जो कि उक्त प्रबन्धको. तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त 
मामला है या विवाद से सुसंगत अथवा सम्बन्धित मामला है : 

क्या श्री जगीर सिंह चालक की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं, तो वह किस राहत का हकदार है ? 

सं ० ओ ० वि ० / एफडी/ 1-86/ 38639.-~-चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राये है कि मै ० हरियाणा शहरी विकास 
प्राधिकरण ( हरटीक्लचर डिपार्टमेन्ट ), सैक्टर 16, फरीदाबाद के श्रमिक श्री अमर नाथ , मार्फत प्रधान मर्कनटाईल इम्पलाईज 
एसोसिएशन , एच०-347, न्यु राजेन्द्र नगर , नई दिल्ली -110060 तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इसमें इसके बाद लिखित 
मामले में कोई प्रौद्योगिक विवाद है ; 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिये , अव , प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं ० 5415-3- श्रम -68/15254, दिनांक 20 जून, 
1978 के साथ पढ़ते हुए अधिसूचना सं ० 11495 - जी - श्रम / 57/ 11245, दिनांक 7 फरवरी, 1958 द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 7 
के अधीन गठित श्रम न्यायालय, फरीदाबाद को विवादग्रस्त या उससे सुसंगत या उससे संबंधित नीचेलिखा मामला न्यायनिर्णय एवं पंचाट तीन 
भास में देने हेतु निर्दिष्ट करते हैं जो कि उक्त प्रवन्धको तया श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या विवाद से सुसंगत प्रयवा संबंधित 
मामला है : -- 

1. क्या श्री अमर नाथ शर्मा की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं, तो वह किस राहत का हकदार है ? 


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